महाकाल-महाधृति

Puraanic contexts of words like Mangalaa, Majjaa, Mani, Manikarnikaa etc. are given here.

महाकाल अग्नि ५०.३९(महाकाल की प्रतिमा के लक्षण), ९६.३(प्रतिष्ठा में अधिवास विधि के अन्तर्गत पूर्व दिशा के द्वारपालों में नन्दि व महाकाल की पूजा का उल्लेख), ९७(शिव प्रतिष्ठा विधि), गरुड १.८७.२४(मनोजव इन्द्र का शत्रु, अश्व रूपी विष्णु द्वारा वध), नारद २.७८(महाकालेश्वर – अधिष्ठित अवन्ती की यात्रा का महत्त्व), पद्म ६.१५१.६७(किरात द्वारा धवलेश्वर लिङ्ग पूजा से महाकाल गण बनना), ब्रह्म १.४१.६६(अवन्तिका पुरी में स्थित महाकाल शिव का माहात्म्य), ब्रह्माण्ड ३.४.३२.२(महाकाल का स्वरूप), मत्स्य ६.१३(बाणासुर द्वारा महाकालत्व प्राप्त करने का उल्लेख), १३.४१( महाकाल में देवी का महेश्वरी नाम से वास), १७९.५(अन्धकासुर व शिव के मध्य अवन्ती में महाकालवन में युद्ध होने का कथन), १८१.२६(दोनों सन्ध्याओं में सान्निध्य हेतु पवित्र स्थानों में से एक), १८३.६४(नन्दी की महाकाल संज्ञा?), २६६.४२(नन्दी की महाकालसंज्ञा?), विष्णुधर्मोत्तर १.१२६.२७(हर के अनुचर बली के महाकाल नाम से कल्पस्थायी होने का उल्लेख), १.१८१.५(हय रूपी विष्णु द्वारा शक्र – पीडक महामाल/महाकाल का वध), शिव ३.१७.२(शंकर के १० अवतारों में से प्रथम अवतार का नाम, महाकाल की शक्ति महाकाली), ४.१६(महाकाल द्वारा दूषण दैत्य का वध), स्कन्द १.१.५.१९१ (शिव – द्वारपाल, नन्दी का रूप), १.१.७.३१(नर्मदा में महाकालेश्वर लिङ्ग की स्थिति का उल्लेख), १.२.४०.१(सिद्ध, माण्टि व चरक – पुत्र, माता – पिता से कालभीति का गर्भ में वास सम्बन्धी वार्तालाप, कालभीति नाम से महाकाल नाम), १.२.४०.१४४(महाकाल द्वारा करन्धम राजा को धर्म स्वरूप, चतुर्युग व्यवस्था का वर्णन), १.२.४०(महाकाल द्वारा नन्दी नाम की प्राप्ति), ४.१.७.९१(महाकाल शब्द की निरुक्ति, माहात्म्य), ४.२.९७.१३१(महाकालेश लिङ्ग का संक्षिप्त माहात्म्य), ५.१.१.२६+ (महाकाल वन का माहात्म्य), ५.१.२३.१ (महाकाल के अन्तर्गत तीर्थ व महाकाल यात्रा), ५.१.२६.१ (महाकाल के चारों दिशाओं में स्थित द्वारपाल), ५.१.२७.९९(अधोज्वाल महाकाल के दर्शन से अश्वमेध फल प्राप्ति का उल्लेख), ५.१.३९(अवन्ती क्षेत्र में महाकाल वन के माहात्म्य का कथन), ५.१.६१.१ (अधिमास में महाकाल वन में स्थिति का महत्त्व), ५.३.१९८.७९(महाकाल में देवी का महेश्वरी नाम से वास), ६.४७(महाकालेश्वर तीर्थ का माहात्म्य, रुद्रसेन राजा द्वारा पूर्व जन्म के वृत्तान्त का वर्णन, वैश्य द्वारा महाकाल की कमल पूजा से जन्मान्तर में राजा बनना), ७.१.१०.७ (जल महाभूत में स्थित तीर्थों में से एक), ७.१.९३(महाकालेश्वर रुद्र का माहात्म्य, चित्राङ्गद गण द्वारा पूजा), ७.१.३२६(महाकालेश्वर का माहात्म्य), हरिवंश २.१२६.१५८(बाणासुर का महाकाल नाम से शिवगण बनना), ३.३७.१५(कालकेयों का अधिपति), लक्ष्मीनारायण ३.१६४.३६(चाक्षुष मनु के काल में हयग्रीव अवतार द्वारा देवपीडक महाकाल असुर का वध), कथासरित् ८.५.१२४(वैतालपति द्वारा महाकाल देव से अग्निक – पुत्री की रक्षा की प्रार्थना, महाकाल से प्राप्त आदेश से योगिनियों द्वारा पुत्री की रक्षा), १२.३५.७(मृगाङ्कदत्त द्वारा शशाङ्कवती की प्राप्ति हेतु उज्जयिनी में महाकाल श्मशान में आगमन की कथा), १८.२.९७(ठिण्ठाकराल नामक जुआरी द्वारा महाकालकी प्रार्थना ) mahaakaala/ mahakala

महाकाली देवीभागवत ३.६.८२(त्रिगुणा प्रकृति द्वारा विष्णु को महालक्ष्मी, शिव को महाकाली तथा ब्रह्मा को महासरस्वती नामक शक्तियां प्रदान), नारद १.६६.११०(क्रोधीश की शक्ति महाकाली का उल्लेख), ब्रह्माण्ड ३.४.४४.५७(वर्णों की शक्तियों में से एक), मत्स्य १७९.१४(अन्धकासुर के रक्त पानार्थ शिव द्वारा सृष्ट मातृकाओं में से एक), वायु १०१.२९८/२.३९.२९८(दक्ष यज्ञ विध्वंस के संदर्भ में महाकाली महेश्वरी का उल्लेख), विष्णु २.१३.४९(महाकाली द्वारा योगी भरत की बलि की अस्वीकृति का कथन), शिव २.२.३२.२५(सती के देहत्याग श्रवण से क्रुद्ध शिव की जटा से महाकाली, वीरभद्र आदि की उत्पत्ति, शिव द्वारा दक्ष यज्ञ विध्वंस की आज्ञा), ३.१७.२(शंकर के प्रथम अवतार  महाकाल की शक्ति का नाम), ५.४५.६७(मधु – कैटभ वध हेतु ब्रह्मा द्वारा महामाया की स्तुति, महाकाली का प्रादुर्भाव), स्कन्द ७.१.१३३(महाकाली पीठ का माहात्म्य ) mahaakaalee/ mahakali

महाकोश वामन ९०.२७(महाकोशा में विष्णु का हंसयुक्त नाम )

महागौरी ब्रह्माण्ड १.२.१६.३३(विन्ध्य पर्वत से प्रसूत नदियों में से एक), मत्स्य ११४.२८(वही), वायु ४५.१०३(वही) mahaagauree/ mahagauri

महाजिह्वा ब्रह्माण्ड २.३.७.९९(ब्रह्मराक्षसों की स्वसाओं में से एक, ब्रह्मधान – पुत्री), वायु ६९.१३४/२.८.१२९(ब्रह्मराक्षसों की स्वसाओं में से एक, ब्रह्मधान – पुत्री), स्कन्द १.२.६३.९(राक्षस, विजय की साधना में बाधक ) mahaajihvaa/ mahajihva

महाज्वाल ब्रह्माण्ड ३.४.२.१४७(नरकों में से एक), ३.४.२.१५७(महाज्वाल नरक को प्राप्त होने वालों के अपेक्षित कर्मों का कथन), विष्णु २.६.१२ (वही) mahajwala

महातप वराह १६+ (महातपा का प्रजापाल राजा से मोक्ष विषयक संवाद), लक्ष्मीनारायण १.५३३(महातपा ऋषि द्वारा प्रजापाल राजा को देह में स्थित देवों में श्रेष्ठता की प्रतिस्पर्द्धा का वर्णन ) mahaatapa/ mahatapa

महातल भागवत २.१.२६(विराट् शरीर में महातल के गुल्फ रूप होने का उल्लेख), २.५.४१(वही), ५.२४.७(भूमि के नीचे के ७ तलों में से एक), ५.२४.२९ (महातल में निवास करने वाले सर्पों के क्रोधवश गण के सर्पों के नाम), वामन ९०.३६(महातल में विष्णु का गुरु नाम), वायु ५०.१२(भूमि के नीचे के ७ तलों में पञ्चम, अपर नाम शर्करातल), ५०.३४(शर्कराभौम में स्थित राक्षसों के पुरों का कथन ) mahaatala/ mahatala

महादंष्ट} ब्रह्माण्ड ३.४.२१.८६(भण्डासुर के सेनापति पुत्रों में से एक), स्कन्द १.१.१७.१३९(इन्द्र – वृत्रासुर संग्राम में वरुण के महादंष्ट} से युद्ध का उल्लेख), कथासरित् ७.५.९०(रूपशिखा – पिता, शृङ्गभुज द्वारा बगुला रूप धारी महादंष्ट} को बाण से विद्ध करना), १४.४.१७९(पद्मप्रभा – पिता ) mahaadanshtra/ mahadanshtra

महादेव कूर्म १.५३.१(कलियुग में महादेव के अवतार), पद्म ६.२५५(शिव का नाम, भृगु के शाप से शिव को योनि लिङ्ग स्वरूप प्राप्ति का वर्णन), ब्रह्माण्ड १.२.१०.५९(रुद्र का अष्टम नाम, मन/चन्द्रमा का रूप), १.२.२६.५६(ब्रह्मा व विष्णु द्वारा महादेव की स्तुति), १.२.२७.१(महादेव द्वारा नग्न विकृत वेश धारण,ऋषियों के शाप से लिङ्ग का पात), २.३.७२.३(मनुष्य प्रकृति के देवों में से एक?), २.३.७२.१०८(शुक्राचार्य द्वारा मन्त्र प्राप्ति हेतु महादेव के पास जाने का वर्णन), ३.४.११.३२(महादेव द्वारा बालक भण्डासुर को वरदान), भागवत ८.१२(शिव द्वारा विष्णु से मोहिनी अवतार का दर्शन कराने की प्रार्थना, मोहिनी रूप दर्शन से शिव का मोहित होना), मत्स्य ४७.१(महादेव द्वारा वसुदेव – पुत्र कृष्ण रूप में अवतरित होने का उल्लेख), ४७.७५(देवों को हराने हेतु शुक्राचार्य द्वारा महादेव से अप्रतीप मन्त्र प्राप्ति का उद्योग), ५४.२+ ( महादेव द्वारा नारद हेतु विभिन्न व्रतों की विधियों का वर्णन), १७९.३(महादेव द्वारा अन्धकासुर के रक्त पानार्थ मातृकाओं की सृष्टि), २४६.६१(वामन के विराट् रूप में वक्ष:स्थल पर महादेव की स्थिति का उल्लेख), २६५.४२(शिव की ८ मूर्तियों में महादेव द्वारा चन्द्रमा की रक्षा का उल्लेख), वायु २६.३(केवल वैवस्वत मन्वन्तर के कलियुग में ही महादेव के अवतार लेने का प्रश्न), २७(महादेव के तनुओं का वर्णन नामक अध्याय), विष्णु १.८.६(ब्रह्मा द्वारा महादेव नामक रुद्र को सोम तनु प्रदान का उल्लेख), विष्णुधर्मोत्तर ३.४८.४९(शिव के पांच मुखों में से पूर्व मुख की महादेव संज्ञा, महादेव के हाथ में अक्षiमाला तथा कमण्डलु धारण), स्कन्द ४.२.७९.९९(महादेव पीठ का संक्षिप्त माहात्म्य ), द्र शंकर, शिव mahaadeva/ mahadeva

महादेवी ब्रह्माण्ड ३.४.३६.४(चिन्तामणि गृह के समीप महादेवी के होत्री व कामेश्वर के होता होने का उल्लेख), भविष्य ३.२.५.४(हरिदास व भक्तिमाता – पुत्री, राक्षस द्वारा हरण, तीन वरों से विवाह की समस्या), मत्स्य १३.३३(शालग्राम में सती की महादेवी नाम से स्थिति का उल्लेख), १७९.३१(अन्धकासुर के रक्त पानार्थ शिव द्वारा सृष्ट मातृकाओं में से एक), वायु ९६.१३०/२.३४.१३०(महादेवा : देवक की ७ पुत्रियों में से एक, वसुदेव – भार्या), स्कन्द ५.३.१९८.७१(शालिग्राम में देवी का महादेवी नाम से वास), कथासरित् १.५.२९(राजा योगनन्द की पत्नी, चित्रकार द्वारा योगनन्द और महादेवी के सजीव से चित्र का निर्माण ) mahaadevee/ mahadevi

महाद्रुम ब्रह्माण्ड १.२.१४.२१(शाकद्वीप के अधिपति हव्य के ७ पुत्रों में से एक), वायु ६९.३५/२.८.३५(विक्रान्त के नरमुख किन्नर पुत्रों में से एक), विष्णु २.४.६०(शाकद्वीप के अधिपति भव्य के ७ पुत्रों में से एक ) mahaadruma/ mahadruma

महाधृति ब्रह्माण्ड २.३.६४.१२(विबुध – पुत्र, कीर्तिरात – पिता, विदेह वंश), भागवत ९.१३.१६(विश्रुत – पुत्र, कृतिरात – पिता, विदेह वंश), विष्णु ४.५.२७(विबुध – पुत्र, कृतरात – पिता, निमि वंश ) mahaadhriti/ mahadhriti