मनोभद्र-मनःस्वामी

Puraanic contexts of words like Manoratha/wish, Manoramaa etc. are given here.

मनोभद्र पद्म ७.३.१८(राजा, हेमप्रभा – पति, गृध्र द्वारा पुत्रों के पूर्व जन्म व गङ्गा माहात्म्य का कथन )

 

मनोरञ्जन गणेश १.१९.१३(अपत्यहीन राजा भीम के २ मन्त्रियों में एक, राजा द्वारा राज्य भार सौंपना )

 

मनोरथ देवीभागवत ९.४९.६(सुरभि गौ – पुत्र), भविष्य ३.३.१२.६४(कालिय से युद्ध में देवसिंह के मनोरथ हय पर आरूढ होने का उल्लेख), ३.३.३२.१९५(तारक द्वारा देवसिंह के मनोरथ हय के वध का उल्लेख), ४.८०(मनोरथ द्वादशी व्रत), स्कन्द ४.१.३१.१०२(लक्ष्मी द्वारा शिव के पात्र में मनोरथवती भिक्षा देने का उल्लेख), ४.२.८०.८(चैत्र शुक्ल तृतीया को मनोरथ तृतीया व्रत व विश्वभुजा देवी की पूजा), कथासरित् १२.४.७१(मनोरथसिद्धि नामक बन्दी द्वारा राजकुमार कमलाकर के मन में हंसावली के प्रति अनुराग उत्पन्न करने का वृत्तान्त), १२.४.२३७(मनोरथसिद्धि बन्दी द्वारा लुप्त हंसावली की खोज ) manoratha

 

मनोरथप्रभा कथासरित् १०.३.८७(पद्मकूट व प्रभा – कन्या, सोमप्रभ से स्ववृत्तान्त का वर्णन, मुनि – पुत्र रश्मिमान् द्वारा मनोरथप्रभा के वियोग में प्राण त्याग), १०.३.१६१(रश्मिमान् से सुमना राजा के रूप में जन्मे सुमना राजा द्वारा रश्मिमान् के शरीर में प्रवेश करके मनोरथप्रभा को प्राप्त करना) manorathaprabhaa

 

मनोरमा देवीभागवत ३.१४+ (वीरसेन – पुत्री, ध्रुवसन्धि – पत्नी मनोरमा द्वारा राज्य – च्युति पर भरद्वाज आश्रम में पुत्र सुदर्शन का पालन), ब्रह्मवैवर्त्त ३.३५(कार्तवीर्य – पत्नी मनोरमा द्वारा देहत्याग), मत्स्य १७९.२६(अन्धकासुर के रक्त पानार्थ शिव द्वारा सृष्ट मातृकाओं में से एक), मार्कण्डेय ६३/६६.६(इन्दीवर विद्याधर – पुत्री व स्वरोचिष – पत्नी मनोरमा के पुत्र विजय का उल्लेख), ६८/७१.१९(मनोरमा – पति नागराज कपोतक की कन्या नन्दा द्वारा राजपत्नी की रक्षा का प्रसंग), वायु ६९.६/२.८.६( मौनेया संज्ञक ३४ अप्सराओं में से एक), विष्णुधर्मोत्तर १.४२.२१(स्त्री रूपधारी विष्णु की श्री में मनोरमा? की स्थिति का उल्लेख), स्कन्द ३.१.१६(स्वनयराज – पुत्री मनोरमा की प्रतिज्ञा व कक्षीवान् से विवाह की कथा), लक्ष्मीनारायण १.४५७.१२९(पति सहस्रार्जुन से दु:स्वप्न सुनकर मनोरमा का ६ चक्रों को भेदकर सती लोक में जाने तथा अदृश्य रूप में पति के साथ युद्ध में जाने का कथन), १.४५८.३२(मनोरमा द्वारा परशुराम से युद्ध में कार्तवीर्य अर्जुन के प्राणों की रक्षा तथा पति को मूर्च्छा से जीवित करना), १.४५८.५८(मनोरमा द्वारा पति से महालक्ष्मी कवच को विप्र को दान में न देने का आग्रह, पति द्वारा कवच दान पर लक्ष्मी की कला मनोरमा द्वारा पति को त्याग विष्णु लोक को प्रस्थान), ३.१५५.३२(इन्दीवर गन्धर्व की कन्या मनोरमा सरित् द्वारा स्वरोचिष को पति बनाकर विहार का कथन), कथासरित् १२.७.३६(उग्रभट राजा की पत्नियों मनोरमा व लास्यवती के पुत्रों भीमभट व समरभट में शत्रुता का वृत्तान्त ) manoramaa

 

मनोवती वराह ७५(ब्रह्मा की मनोवती नामक सभा का वर्णन), वायु ३४.७२(ब्रह्मा की मनोवती सभा के वैभव का वर्णन), ६९.४९/२.८.४९(तुम्बुरु की २ कन्याओं में से एक, पञ्चचूडा अप्सराओं में से एक), हरिवंश २.९३.२८(मनोवती द्वारा रम्भा रूप धारण), कथासरित् ४.२.१३६(चित्राङ्गदा – कन्या मनोवती के मनुष्य राजा से विवाह तथा अगले जन्म में पुन: जीमूतवाहन की भार्या बनने का वृत्तान्त), ८.२.३३०(सूर्यप्रभ द्वारा सातवें पाताल में तन्तुकच्छ असुरराज की कन्या मनोवती को प्राप्त करने का कथन), ८.४.१०४(सूर्यप्रभ – भार्या मनोवती द्वारा विभिन्न प्रदेशों की स्त्रियों के विभिन्न गुणों का कथन ) manovatee/ manovati

 

मनोहर पद्म ५.६७.४१(सुमनोहरा : सुरथ – पत्नी), मत्स्य ५.२४(मनोहरा : धर वसु – पत्नी), लिङ्ग १.४९.६७(मनोहर वन में नन्दी आदि का वास), वामन ३७.३४(सरस्वती नदी का उत्तरकोसल में मनोहरा नाम से विख्यात होना), ७६.२४(विष्णु द्वारा इन्द्र को पापमुक्त करा कर मनोहरा नदी में स्नान कराना), विष्णु १.१५.१३(धर्म वसु व मनोहरा के ३ पुत्रों के नाम), कथासरित् १७.४.२७ (पद्मावती की सखी मनोहारिका द्वारा पद्मावती व मुक्ताफलकेतु के मिलन में सहायक होने का वृत्तान्त ), द्र. वंश वसुगण manohara

 

मन:शिला गरुड २.३०.५३/२.४०.५३(मृतक के गात्र में मन:शिला देने का उल्लेख )

 

मन:स्वामी कथासरित् १२.२२.७(मन:स्वामी नामक विप्र – पुत्र द्वारा गुलिका की सहायता से स्त्री रूप धारण कर स्त्री और पुरुष रूप में कईं सम्बन्ध बनाने का वृत्तान्त), १२.२६.३२(विष्णुस्वामी के शिष्य मन:स्वामी द्वारा चोर की पत्नी धनवती से धन लेकर धनवती से पुत्र उत्पन्न करना, पुत्र द्वारा उपयुक्त पिता के पिण्डदान का प्रश्न ) manahswaamee/ manahswami