मदनसेना-मधु

Puraanic contexts of words like Madayanti, Madaalasaa, Madiraa / wine, Madra, Madhu / honey etc. are given here.

मदनसेना कथासरित् ८.१.४२(सूर्यप्रभ द्वारा वीरभट – पुत्री मदनसेना आदि अपनी सात भार्याओं के साथ एक ही समय में विहार का कथन ) madanasenaa

 

मदनालसा देवीभागवत ६.२०.४(चम्पक विद्याधर के साथ क्रीडामग्न मदनालसा द्वारा अनायास प्राप्त बालक को पुत्र बनाने की कामना तथा इन्द्र द्वारा वर्जन का वृत्तान्त), भविष्य ३.२.१४.१९(विद्याधर चम्पक की पत्नी मदनालसा द्वारा निर्जन वन में प्राप्त बालक का वर्णन ) madanaalasaa

 

मदनिका मार्कण्डेय २.१६(मेनका – पुत्री, विद्युद्रूप राक्षस की भार्या, राक्षस की मृत्यु पर कन्धर पक्षी की भार्या बन कर पक्षी रूप धारण करना, कन्धर व मदनिका से तार्क्षी का जन्म), योगवासिष्ठ ६.१.१०६.३६(कुम्भ रूप धारी चूडाला का मदनिका नाम से शिखिध्वज की पत्नी बनना ) madanikaa

 

मदपाल भविष्य ३.२.४.२४(देवयाजी वैश्य के धूर्त्त पुत्र मदपाल द्वारा चन्द्रकान्ति से विवाह व उसकी हत्या का वृत्तान्त), ३.२.९? (मणिग्रीव वैश्य – पुत्र, पत्नी कामालसा द्वारा सत्य वचन की रक्षा का वृत्तान्त ) madapaala/ madapala

 

मदयन्ती भागवत ९.९.३८(वसिष्ठ द्वारा मित्रसह – पत्नी मदयन्ती में गर्भाधान करने व मदयन्ती द्वारा गर्भ पर अश्म प्रहार करने के कारण अश्मक पुत्र प्राप्त करने का कथन), विष्णु ४.४.६९(वसिष्ठ द्वारा मित्रसह – पत्नी मदयन्ती में गर्भाधान करने व मदयन्ती द्वारा गर्भ पर अश्म प्रहार करने के कारण अश्मक पुत्र प्राप्त करने का कथन), स्कन्द ३.३.२.३५(राजा मित्रसह की पत्नी मदयन्ती द्वारा राजा को गुरु को शाप देने से निवृत करने का उल्लेख), ७.३.२.१८(उत्तङ्क द्वारा सौदास – पत्नी मदयन्ती से कुण्डल प्राप्त करने की कथा ) madayantee/ madayanti

 

मदवती भविष्य ३.२.११.२४(मदवती का समुद्र से प्राकट्य, पिता के शाप से बकवाहन राक्षस द्वारा मदवती का उपभोग, धर्मवल्लभ राजा द्वारा मदवती के पाणिग्रहण का वृत्तान्त), ३.४.१७.२९(इल नृप की पत्नी मदवती पर इल द्विज की आसक्ति की कथा ) madavatee/ madavati

 

मदान्ध स्कन्द ५.२.२३(अहंकारी राजा मदान्ध के राज्य में अनावृष्टि, देवों द्वारा मेघनादेश्वर लिङ्ग की स्थापना),

 

मदालसा गर्ग ७.४२.४(शकुनि असुर की पत्नी मदालसा की क्षमा याचना पर कृष्ण द्वारा बालक को राज्य देना), देवीभागवत ७.३८.१३(मदालसा पीठ में योगेश्वरी देवी के निवास का उल्लेख), ब्रह्मवैवर्त्त ४.६२.४३(मदालसा के शाप से बलि के राज्यभ्रष्ट होने का उल्लेख),  भविष्य ३.३.९.२२(वत्सराज द्वारा गुर्जर देश में मदालसा के पास जाने का उल्लेख), मार्कण्डेय २१.२९/१९.२९(मदालसा की सखी द्वारा राजा कुवलयाश्व को विश्वावसु गन्धर्व – पुत्री मदालसा का परिचय देना, पातालकेतु दानव द्वारा मदालसा का हरण, कुवलयाश्व द्वारा पातालकेतु का वध, मदालसा की भार्या रूप में प्राप्ति), २१.६२/१९( मदालसा का कुवलयाश्व से परिणय), २२.२५/२०.२५(कुवलयाश्व की मृत्यु का मिथ्या समाचार सुनकर मदालसा द्वारा प्राण त्याग का उल्लेख), २३.६६/२१.६६(अश्वतर व कम्बल नागों द्वारा तप से मदालसा को पुत्री रूप में प्राप्त करने का वृत्तान्त), २४.३६/२२ (कुवलयाश्व/ऋतध्वज द्वारा अश्वतर – पुत्री मदालसा की भार्या रूप में पुन: प्राप्ति), २५.९/२३.९(मदालसा द्वारा प्रथम पुत्र विक्रान्त को वैराग्य की शिक्षा), २५.२४/२३.२४(मदालसा द्वारा द्वितीय व तृतीय पुत्रों को वैराग्य की शिक्षा), २६/२३.३५+ (मदालसा द्वारा चतुर्थ पुत्र अलर्क को प्रवृत्ति मार्ग की विस्तार से शिक्षा), ३६.६/३३.६(मदालसा द्वारा असह्य दुःख के समय शिक्षा के लिए अलर्क को अङ्गुलीयक में विहित शासन देना), वामन ५९.१२(पातालकेतु राक्षस द्वारा विश्वावसु की पुत्री मदालसा का हरण), स्कन्द ४.२.९७.२३०(मदालसेश्वर लिङ्ग का संक्षिप्त माहात्म्य : सर्वविघ्नहर्त्ता),लक्ष्मीनारायण १.३९२.३९(राजा ऋतध्वज द्वारा पाताल में विश्वावसु – कन्या मदालसा की पातालकेतु दैत्य से रक्षा व पाणिग्रहण), १.३९२.९८(पति की मृत्यु का मिथ्या समाचार सुनकर मदालसा द्वारा मृत्यु का वरण, अश्वतर नाग की कन्या के रूप में जन्म लेना), १.३९३.२४(अश्वतर द्वारा स्वपुत्री मदालसा का ऋतध्वज हेतु दान), १.३९३.४१(मदालसा द्वारा प्रथम पुत्र विक्रान्त को निवृत्ति विषयक उपदेश), १.३९४.१(मदालसा द्वारा द्वितीय पुत्र सुबाहु को निवृत्ति मार्ग का उपदेश), १.३९४.३३(मदालसा द्वारा तृतीय पुत्र शत्रुमर्दन को निवृत्ति मार्ग का उपदेश), १.३९४.९१+ (मदालसा द्वारा चतुर्थ पुत्र अलर्क को प्रवृत्ति मार्ग का उपदेश), १.३९५.१०२(मदालसा व ऋतध्वज द्वारा तप से दिव्य देह प्राप्त कर अक्षर धाम प्राप्ति का उल्लेख ) madaalasaa/ madalasaa

 

मदिरा ब्रह्माण्ड २.३.७१.१६१(वसुदेव की पत्नियों में से एक), २.३.७१.१७१ (वसुदेव व मदिरा के नन्द आदि पुत्रों के नाम), ३.४.२०.७३(किरिचक्र रथेन्द्र के पर्व पर मदिरासिन्धु देवता की स्थिति का कथन, सुरासिन्धु द्वारा पिपासाग्रस्त शक्तियों की पिपासा शान्त करना), ३.४.२८.५७(मदिरासिन्धु/सुरासिन्धु द्वारा शक्तियों की तृषा शान्त करने का वृत्तान्त, दण्डिनी/दण्डनाथा देवी द्वारा सुराम्बुधि को वरदान), भविष्य ३.३.३१.४६(कितव राक्षस द्वारा मायावर्म नृपति की कन्या मदिरेक्षणा का उपभोग, कितव की मृत्यु के पश्चात् तारक के साथ विवाह), भागवत ९.२४.४५(वसुदेव की पत्नियों में से एक, नन्द, उपनन्द, कृत आदि की माता), मत्स्य २५१.२(समुद्र मन्थन से अमृत उत्पत्ति से पूर्व विष, धन्वन्तरि व मदिरा की उत्पत्ति का उल्लेख), विष्णु ४.१३.१५७(बलभद्र द्वारा मदिरा पान के कारण स्यमन्तक मणि धारण करने में असमर्थता का उल्लेख), ४.१५.१८(वसुदेव की पत्नियों में से एक, नन्द, उपनन्द, कृत आदि की माता), ५.२५.३(वरुण – पुत्री मदिरा का वृन्दावन में कदम्ब वृक्ष में लीन होना, बलराम द्वारा मदिरा का पान), लक्ष्मीनारायण १.५४३.७३(, २.२४४.८६(मदिराश्व राजा द्वारा हिरण्यकर ऋषि को स्व कन्या दान का उल्लेख), ३.७४.६६(मदिराश्व द्वारा हिरण्य को सुता प्रदान करने से अक्षर धाम प्राप्ति का उल्लेख), कथासरित् १३.१.२६ (मदिरावती कन्या द्वारा स्वप्रिय को प्राप्त करने में आई कठिनाईयों का वर्णन ) madiraa

 

मदोत्कट ब्रह्माण्ड ३.४.२१.८८(भण्डासुर के सेनापति पुत्रों में से एक), मत्स्य १३.२८(चैत्ररथ तीर्थ में देवी की मदोत्कटा नाम से स्थिति का उल्लेख), स्कन्द ५.३.१९८.६६(चैत्ररथ में देवी का मदोत्कटा नाम), कथासरित् १०.४.१४५ (मदोत्कट नामक सिंह द्वारा उष्ट} अनुचर के भक्षण की कथा ) madotkata

 

मद्गु मत्स्य ११४.४४(मद~गुरक : प्राच्य जनपदों में से एक), विष्णुधर्मोत्तर २.१२०.२१(वसा हरण  से मद्गु योनि प्राप्ति का उल्लेख ) madgu

 

मद्य ब्रह्माण्ड ३.४.७.६३(मद्यपान के दोष), ३.४.८.४१(निषिद्ध द्रव्यों में मद्य के आपेक्षिक पाप का कथन), स्कन्द ५.१.३०.४३(मद्य के ८ प्रकारों का उल्लेख), ५.३.१५९.१२(मद्यप के श्यावदन्त होने का उल्लेख ), द्र. मदिरा, सुरा madya

 

मद्र नारद १.५६.७४४(मद्र देश के कूर्म का पाणि मण्डल होने का उल्लेख), ब्रह्माण्ड १.२.१६.४०(माद्रेय : मध्यदेश के राज्यों में से एक), २.३.३.३१(माद्रव : धर्म व विश्वा के विश्वेदेव संज्ञक पुत्रों में से एक), २.३.१३.५२(मद्रव : अमरकण्टक पर्वत पर मद्रव संज्ञक पुण्य स्थान का उल्लेख), २.३.१३.५७(मद्रव पर्वत : श्राद्ध हेतु प्रशस्त स्थानों में से एक), भागवत ९.२३.३(शिबि के ४ पुत्रों में से एक), मत्स्य ११५.७(मद्र देश के अधिपति पुरूरवा के पूर्व जन्म का वृत्तान्त), वामन ७९.१२(मद्र देश के वैश्य द्वारा प्रेत की मुक्ति हेतु पिण्डदान), विष्णु २.३.१८(माद्रा: भारत की नदियों के जलों का सेवन करने वालों में मद्रवासियों का उल्लेख), विष्णुधर्मोत्तर ३.१२१.४(मद्र देश में नृकेसरी की पूजा का निर्देश), महाभारत कर्ण ४०.३०(कर्ण द्वारा मद्र देश के निवासियों के आचार की निन्दा), लक्ष्मीनारायण १.३६६(मद्र देश के राजा अश्वपति द्वारा सावित्री देवी की आराधना, पुत्री रूप में सावित्री का जन्म), कथासरित् ८.१.१७(मद्र देश में चन्द्रप्रभ – पुत्र सूर्यप्रभ का चरित्र ) madra

 

मद्रक ब्रह्माण्ड २.३.७४.२३(शिबि के ४ पुत्रों में से एक, मद्रक के मद्रक जनपद का उल्लेख), २.३.७४.१९१(मगधवंशी विश्वस्फाणि द्वारा क्षत्रिय राजाओं के बदले प्रतिष्ठित जातियों में से एक), भागवत १०.७२.१३(वृकोदर/भीम द्वारा मद्रकों की सहायता से प्राची दिशा की दिग्विजय का उल्लेख), १२.१.३६(मागध विश्वस्फूर्जि द्वारा मद्रक इत्यादि अपर वर्णों की प्रतिष्ठा का उल्लेख), वायु ९९.२३/ २.३७.२३(क्षिति के ४ पुत्रों में से एक, माद्रक जनपद का अधिपति), विष्णु ४.१८.१०(शिबि के ४ पुत्रों में से एक ) madraka

 

मद्रकेश भविष्य ३.३.३१.१२१(मद्र देश के अधिपति मद्रकेश द्वारा अश्विनौ की आराधना से १० पुत्र व १ कन्या की प्राप्ति), ३.३.३२.३८(मद्रकेश के कौरवों के अंश रूप पुत्रों के नाम), ३.३.३२.१६८(पृथ्वीराज – सेनानी, कैकय राजा से युद्ध में मृत्यु ) madrakesha

 

मद्रा वायु ४५.१०२(विन्ध्य पर्वत से नि:सृत नदियों में से एक), ७०.६८/२.९.६८(भद्रा : भद्राश्व व घृताची की १० अप्सरा कन्याओं में से एक, सोम – माता), ९९.१२४/२.३७.१२१(रौद्राश्व व घृताची की १० अप्सरा कन्याओं में से एक ), द्र. भद्रा madraa

 

मद्रिटा लक्ष्मीनारायण २.१९०.२(श्रीहरि द्वारा राजा मुद्राण्ड की नगरी मद्रिटा में प्रवेश तथा राजा को उपेदश का वृत्तान्त),

 

मधु गरुड २.३०.५१/२.४०.५१(मृतक के शोणित में मधु देने का उल्लेख), गर्ग ७.२०.३०(प्रद्युम्न – सेनानी मधु के कर्ण से युद्ध का उल्लेख), ७.४७.१(प्रद्युम्न द्वारा सेना सहित मधुधारा नदी तट पर आना), १०.१५.२३(कृष्ण – पुत्र मधु द्वारा राजा इन्द्रनील को विरथ करना), १०.२४.३५(कृष्ण – पुत्र मधु द्वारा युद्ध में साम्ब की सहायता करना), देवीभागवत ४.२०.५४(शत्रुघ्न द्वारा मधु – पुत्र लवण दानव का वध), नारद १.९०.७१(मधुक से गान सिद्धि का उल्लेख), पद्म १.७२(विष्णु/माधव द्वारा मधु का वध), ब्रह्म २.२८.३(अग्नि तीर्थ वर्णन के संदर्भ में दिति – पुत्र मधु द्वारा जातवेदा/दक्ष अग्नि के हनन का उल्लेख), ब्रह्मवैवर्त्त २.३०.६९(मधुमक्षिका को मार कर मधु ग्रहण करने पर नरक में गरल कुण्ड प्राप्ति का उल्लेख), ब्रह्माण्ड १.२.३३.१६(मधुक : मध्यमाध्वर्युओं में से एक), २.३.७.१३३(खशा व कश्यप के प्रधान राक्षस पुत्रों में से एक), २.३.६३.३८(मधु राक्षस के पुत्र धुन्धु का वृत्तान्त), २.३.७०.४६(देवन – पुत्र मधु के पुत्रों के नाम, ज्यामघ वंश), ३.४.१५.२२(सुराधिपति/इन्द्र द्वारा कामेश्वर व कामाक्षी के विवाह में शिव को मधुपात्र भेंट करने का उल्लेख), भविष्य ३.४.८.१०(आषाढ? मास के सूर्य के माहात्म्य के संदर्भ में माधव के तप से मधु/मध्वाचार्य की सूर्यांश से उत्पत्ति का वृत्तान्त), ३.४.२२.२१(मुकुन्द – शिष्य मधु के जन्मान्तर में हरिदास वैष्णव के रूप में उत्पन्न होने का उल्लेख), भागवत १.११.११(द्वारका की रक्षा करने वाले वंशों में से एक), ५.१५.१५(बिन्दुमान् व सरघा – पुत्र, सुमना – पति, वीरव्रत – पिता, गय वंश), ९.११.१४(शत्रुघ्न द्वारा मधु – पुत्र लवण का वध करके मधुवन में मथुरापुरी के निर्माण का उल्लेख), ९.२३.२७(कार्तवीर्य अर्जुन के नष्ट होने से बचे ५ पुत्रों में से एक), १०.९०.३३(कृष्ण के १८ महारथी पुत्रों में से एक), १२.११.३३(मधु मास में धाता नामक आदित्य के रथ का कथन), मत्स्य ९.१२(उत्तम मनु के मास नाम वाले १० पुत्रों में से एक), ४४.४४(देवक्षत्र – पुत्र, पुरवस – पिता, ज्यामघ वंश), १५४.२४२(शिव को मोहित करने के लिए कामदेव के मधु मित्र सहित आने का उल्लेख), १७१.४९(विश्वा व धर्म के विश्वेदेव संज्ञक पुत्रों में से एक), २०४.५(पितरों द्वारा अपेक्षित श्राद्ध योग्य पदार्थों में से एक), लिङ्ग १.३९(मधु योग में कल्प वृक्ष की सृष्टि), वराह १०४(मधु धेनु दान का माहात्म्य), वामन ९०.८(मधु नदी में विष्णु का चक्रधर नाम से वास), वायु २३.२००/१.२३.१८९(२२वें परिवर्त्त में लाङ्गली संज्ञक अवतार के पुत्रों में से एक), ५२.५(मधु – माधव मास में धाता व अर्यमा सूर्यों के रथ का कथन), ६२.६६/ २.१.६६(चाक्षुष मन्वन्तर के सप्तर्षियों में से एक), ६९.१६६/२.८.१५९(खशा व कश्यप के प्रधान राक्षस पुत्रों में से एक), ९५.४५(देवन – पुत्र मधु के पुत्रों के नाम), विष्णु ३.१.२८(चाक्षुष मनु के काल के सप्तर्षियों में से एक), ४.११.२१(परशुराम द्वारा वध से बचे कार्त्तवीर्य अर्जुन के ५ पुत्रों में से एक), ४.११.२६(वृष – पुत्र, वृष्णि – प्रमुख १०० पुत्रों के पिता, कार्त्तवीर्य वंश), ४.१२.४२(देवक्षत्र – पुत्र, कुमारवंश – पिता, ज्यामघ वंश), विष्णुधर्मोत्तर १.२००.१(पुलोमा – पुत्र मधु द्वारा शिव से शूल प्राप्त करने तथा माली – कन्या कुम्भीलसी का हरण करके लवण पुत्र उत्पन्न करने का कथन), १.२४२.८+ (राम द्वारा शत्रुघ्न को मधुवन में लवण का वध कर मथुरा पुरी बसाने का निर्देश), २.१२०.२०(मधु हरण से दंश योनि प्राप्ति का उल्लेख), स्कन्द १.२.४.८०(कनीयस् प्रकार के दान के द्रव्यों में से एक), १.२.४१.९९(अर्घ निर्माण हेतु अपेक्षित द्रव्यों में से एक), ४.२.६१.२१७(मधुहा विष्णु की मूर्ति के लक्षण), ५.१.८.६९(दुर्भगा तीर्थ में मधु से तुलादान सौभाग्यदायक), ५.१.३४.२६(काम के आग्रह पर शक्र द्वारा मधु को काम का अनुचर बनने का निर्देश ; शिव विमोहन प्रसंग), ५.३.७९.५(मधुस्कन्द तीर्थ में मधु – मिश्रित तिल दान का माहात्म्य), हरिवंश १.६.३०(दैत्यों द्वारा द्विशीर्षा मधु को पृथिवी दोहन हेतु ऋत्विज बनाना), १.११.३३(मधु राक्षस के पुत्र धुन्धु के वध का वृत्तान्त), १.३३.५४(वृष – पुत्र, माधव वंश प्रवर्तक), ३.२६(मधु का विष्णु से युद्ध, हयग्रीव द्वारा मधु का वध), महाभारत उद्योग ६४.१८(विदुर द्वारा गन्धमादन पर्वत पर द्रष्ट दिव्य मधु का कथन), द्रोण ११२.६२(सात्यकि द्वारा कैलातक मधु पान के प्रभाव का कथन), अनुशासन ११५.८(मधु मांस अभक्षण से अश्वमेध के बराबर फल की प्राप्ति का उल्लेख), वा.रामायण ७.२५.२७(मधु द्वारा कुम्भीनसी का अपहरण करने पर रावण द्वारा मधु को प्राण दान), ७.६१(लोला – पुत्र, कुम्भीनसी – पति व लवण – पिता मधु द्वारा शिव से दिव्य शूल की प्राप्ति), ७.७९.१८(इक्ष्वाकु – पुत्र राजा दण्ड द्वारा मधुमन्त नगर बसाने का उल्लेख), लक्ष्मीनारायण ३.३६.३२(रसभक्ष असुर के पुत्र मधुभक्ष द्वारा शिव से वर पाकर ओषधियों के रसों के भक्षण तथा श्रीहरि द्वारा सुदर्शन चक्र से मधुभक्ष के वध का वृत्तान्त ), द्र. मन्वन्तर, वंश भरत, सुमधु madhu

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