मङ्गलचण्डी-मणिकर्णिका

Puraanic contexts of words like Mangalaa, Majjaa, Mani, Manikarnikaa etc. are given here.

मङ्गलचण्डी देवीभागवत ९.४७(मङ्गलचण्डी द्वारा त्रिपुर दैत्य के वध में शिव की सहायता, शिव द्वारा स्तुति, मङ्गलचण्डी के ध्यान का स्वरूप), ब्रह्मवैवर्त्त २.१.८६(प्रकृति के प्रधानांशों में से एक देवी मङ्गलचण्डी के गुणों का कथन), २.४४(मङ्गलचण्डी स्तोत्र ) mangalachandee/ mangalachandi

 

मङ्गला देवीभागवत ७.३८.२४(मङ्गला देवी की गया क्षेत्र में स्थिति), नारद १.९१.६४(ईशान शिव की द्वितीय कला), पद्म २.५१.४५(शिवशर्मा द्वारा स्वभार्या मङ्गला को भिक्षुणी रूप में आई पूर्व पत्नी सुदेवा का सत्कार करने का निर्देश), २.५२.१(शिवशर्मा द्वारा मङ्गला को पूर्व – पत्नी सुदेवा के विषय में बताना), ब्रह्म २.५२.९४/१२२(मङ्गला नदी की इन्द्र के अभिषेक जल से उत्पत्ति), मत्स्य १३.३५(गङ्गा में देवी का मङ्गला नाम), १७९.२१(अन्धकासुर के रक्त पानार्थ शिव द्वारा सृष्ट मातृकाओं में से एक), वायु १०६.५८/२.४४.५८(मङ्गलागौरी : गया में शिला को स्थिर करने के लिए शिला पर स्थित देवियों में से एक),स्कन्द ४.२.७९.१०२(मङ्गलदायी मङ्गला पीठ का उल्लेख), ४.२.९७.१८६(मङ्गला गौरी की प्रदक्षिणा का माहात्म्य), ५.३.१९८.७२(शूलमूलाग्र से नि:सृत उमा देवी की पुरुषोत्तम क्षेत्र में मङ्गला नाम से स्थिति का उल्लेख), ७.१.६०(प्रभास क्षेत्र की ३ दूतियों में से एक, ब्राह्मी देवी का रूप, माहात्म्य), लक्ष्मीनारायण १.३८५.३२(मङ्गला का कार्य), २.८.११(बालकृष्ण के दुग्धपान हेतु मङ्गलागौरी नामक गाय को दुहने का उल्लेख), २.२९७.९१(मङ्गलादि पत्नियों के गृह में कृष्ण द्वारा केश साधन का उल्लेख), ४.१०१.८५(कृष्ण  – पत्नी मङ्गला के पुत्र प्रभासक व पुत्री भास्वरा का उल्लेख), कथासरित् ८.२.१७७(तुम्बुरु – कन्या मङ्गलावती के सुनीथ की भार्या बनने का उल्लेख ) mangalaa

 

मङ्गु ब्रह्माण्ड २.३.७१.१११(उपमङ्गु व मङ्गु : श्वफल्क व गान्दिनी के पुत्रों में २), वायु ९६.११०/२.३४.११०(वही) mangu

 

मज्जा गरुड २.२२.५९(मज्जा में शाक द्वीप की स्थिति का उल्लेख), २.२२.६१(मज्जा में घृत सागर की स्थिति का उल्लेख), पद्म ६.६.२७(, ब्रह्माण्ड ३.४.४४.९०(म वर्ण की शक्ति के रूप में मज्जा का उल्लेख), भविष्य ४.६९.३७(गौ के शरीर में देवताओं की स्थिति के संदर्भ में मज्जा में क्रतुओं की स्थिति का उल्लेख ) majjaa

मज्जा पर वैदिक संदर्भ

 

मञ्जरी स्कन्द ५.१.८.३४(आम्र मञ्जरी से उर्वशी के जन्म का कथन ), द्र. चम्पकमञ्जरी, मदनमञ्जरी manjaree/ manjari

 

मञ्जीर देवीभागवत ९.१९.२४(स्वाहा से आहृत मञ्जीर युग्म की तुलसी को प्राप्ति), ब्रह्मवैवर्त्त २.१६.१३५(स्वाहा के मञ्जीर युग्म का शंखचूड द्वारा हरण का उल्लेख), manjeera

 

मञ्जुघोषा पद्म ६.४६.१४(मञ्जुघोषा अप्सरा का मेधावी मुनि के साथ विहार, शाप प्राप्ति), ब्रह्माण्ड ३.४.३३.१९(ललिता देवी का ध्यान करने वाली अप्सराओं में से एक), भविष्य ३.४.८.५८(मेधावी मुनि व मञ्जुघोषा से भगशर्मा पुत्र की उत्पत्ति), लक्ष्मीनारायण १.२४६.४९(मेधावी मुनि द्वारा मञ्जुघोषा अप्सरा के साथ भोग व शाप दान की कथा), ३.७८.२६(मञ्जुघोषा अप्सरा द्वारा सुचन्द्रिका गोपी से स्वर्गप्राप्ति का कारण ज्ञात करना ) manjughoshaa

 

मञ्जुमती कथासरित् १२.४.३४(मायाबटु भिल्लराज की पत्नी, प्रतीहार द्वारा हानि पंहुचाने की चेष्टा )

 

मञ्जुलकेश लक्ष्मीनारायण ३.१८५(कृष्ण को सर्वस्व अर्पण करने वाले भक्त मञ्जुलकेश की कथा),

 

मञ्जुला लक्ष्मीनारायण २.२८३.५८(मञ्जुला द्वारा बालकृष्ण को केयूर देने का उल्लेख), ३.२०५.३३(वात्सल्यधीर भक्त की पतिव्रता पत्नी मञ्जुलिका की भक्ति से प्रसन्न साधु द्वारा चतुर्भुज रूप के दर्शन देना), ४.१०१.१२६(कृष्ण – पत्नी मञ्जुला की पुत्री मातङ्गिनी व पुत्र महेश्वर का उल्लेख ) manjulaa

 

मणि अग्नि २४६(रत्न लक्षण के संदर्भ में विभिन्न प्रकार की मणियों के नाम), २६७.११(माहेश्वर स्नान के संदर्भ में हाथ में मणि बन्धन हेतु अक्रन्दयति सूक्त का निर्देश), गरुड १.७१(मरकत मणि की उत्पत्ति व महिमा), देवीभागवत ५.२०.१६ (महिषासुर वध के पश्चात् देवी का वास  स्थान मणिद्वीप), १२.१०+ (मणिद्वीप का वर्णन), नारद २.२०.७(धर्माङ्गद द्वारा मलय पर्वत पर पांच विद्याधरों को जीतकर पांच दिव्य मणियां प्राप्त करना, मणियों की दिव्यता का वर्णन), पद्म ३.२५.८ (मणिमान् तीर्थ का संक्षिप्त माहात्म्य : अग्निष्टोम फल की प्राप्ति), ६.६.२५(बल असुर के अस्थि कणों से षट्कोणीय मणियों की उत्पत्ति का उल्लेख), ब्रह्मवैवर्त्त ३.४.४७(नख सौन्दर्य हेतु मुनीन्द्रनाथ को मणीन्द्रसार लक्ष दान का उल्लेख), ब्रह्माण्ड १.२.२९.७४(चक्रवर्तियों के ७ प्राणहीन रत्नों में से एक), २.३.७.३७ (काद्रवेय नागों में से एक), भविष्य ३.४.१०(विष्णुशर्मा द्वारा पारसमणि के तिरस्कार की कथा), वराह ११(राजा दुर्जय के सत्कार हेतु गौरमुख मुनि द्वारा मणि प्राप्ति, दुर्जय द्वारा मणि प्राप्ति की चेष्टा व निधन का प्रसंग), ७९.१४(मणि शैल पर स्थित वनों की शोभा का कथन), १४८.४४(मणिपूर गिरि तथा उस पर स्थित विष्णु तीर्थों का माहात्म्य, विष्णु का नाम स्तुतस्वामी), वामन ५७.६४(चन्द्रमा द्वारा स्कन्द को मणि नामक गण प्रदान करना), ९०.७(मणिमती ह्रद में विष्णु का शम्भु नाम से वास), वायु ५७.६८(चक्रवर्तियों के ७ प्राणहीन रत्नों में से एक), ६९.७४/२.८.७१(काद्रवेय नागों में से एक), ७८.५३/२.१६.५३(मणि आदि द्रव्यों की सिद्धार्थ या तिल कल्क से शुद्धि होने का उल्लेख), विष्णु २.५.६(पाताल में नागों के आभूषणों के रूप में मणियों का उल्लेख), विष्णुधर्मोत्तर २.१०९(मणियों के प्रकार, कल्पन, बन्धन), २.१३२.१८(शान्ति हेतु मणि द्रव्य), शिव ४.१७.६(चन्द्रसेन राजा को मणिभद्र द्वारा दत्त मणि का वर्णन), स्कन्द १.१.८.२२(ब्रह्मा द्वारा मणिमय लिङ्ग की पूजा का उल्लेख), १.३.१.७.३ (कृतयुग में अग्निमय/शोण शैल के त्रेता युग में मणि पर्वत तथा अन्य युगों में अन्य नामों  का उल्लेख), ४.२.६८.८१(विष व व्याधिहारक, सुख सौभाग्य दायक मणिकुण्ड का उल्लेख), ५.१.४४.२४(समुद्र मन्थन से प्राप्त कौस्तुभ मणि विष्णु को देने का उल्लेख), हरिवंश २.६४.२२ (मणियुक्त मणिपर्वत के शिखर को कृष्ण द्वारा उखाड कर द्वारका ले जाने की कथा), २.९९.२२(कृष्ण द्वारा मणिपर्वत को अन्त:पुर में रखना), महाभारत आश्वमेधिक ८०.४२(सञ्जीवन मणि से अर्जुन के जीवित होने का वृत्तान्त), योगवासिष्ठ ६.१.८८(साधक द्वारा अनायास प्राप्त वास्तविक मणि की उपेक्षा कर काच मणि को वास्तविक समझने का वर्णन), ६.१.९०.१९(तप की कांच मणि से उपमा), वा.रामायण ५.६६(सीता द्वारा अभिज्ञान रूप में हनुमान को दत्त मणि के दर्शन से राम का विलाप), लक्ष्मीनारायण १.५८१.४३१(मधु व कैटभ द्वारा कृष्ण के ह्रदय से मणि लेकर नीलपर्वत पर रखने व पृथिवी द्वारा सदैव रक्षा करने की कथा), २.७७.४४(कृष्ण मणि दान से खननादि के पाप के निवारण का उल्लेख), २.२०२(श्रीहरि के मणिपत्तन में स्वागत व भ्रमण का वर्णन), २.२२५.९६(दैत्यों को मणि दान का उल्लेख), ३.३३.८६(माणेय : मेरु के पूर्व – उत्तर में स्थित २ पर्वतों में से एक, पक्षवान् पर्वतों में से एक), ४.२६.५७(माणिकीश कृष्ण की शरण से काम से मुक्ति का उल्लेख), कथासरित् १२.७.७६(मणिदत्त वणिक् द्वारा लाए गए अश्वरत्न को प्राप्त करने के लिए भीमभट व समरभट में युद्ध की कथा), १२.२८.७(मणिवर्मा वणिक् द्वारा अनङ्गमञ्जरी को पत्नी रूप में प्राप्त करना, पत्नी व पत्नी के प्रेमी को मृत देखकर मणिवर्मा की भी मृत्यु की कथा), १७.१.६०(मणिपुष्पेश्वर गण द्वारा चन्द्रलेखा कुमारी का अभिलाषापूर्ण अवलोकन करने पर देवी से शाप प्राप्ति ), द्र. चिन्तामणि, चूडामणि, महामणि, वसुमणि, वीरमणि, स्यमन्तकमणि mani

 

मणि- ब्रह्माण्ड १.२.१४.१७(मणीवक : हव्य के शाकद्वीप के अधिपति ७ पुत्रों में से एक), १.२.१९.९२(श्याम पर्वत के मणीवक वर्ष? नाम का उल्लेख), १.२.२०.३०(तृतीय तल में मणिनाग के पुर की स्थिति का उल्लेख), २.३.७.३६(मणिस्थक : काद्रवेय नागों में से एक), २.३.७.१२३(मणिमन्त : पुण्यजनी व मणिभद्र के २४ पुत्रों में से एक), २.३.७.४५३(मणिमन्त पर्वत : गरुडों द्वारा व्याप्त स्थानों में से एक), मत्स्य २२.३९(मणिमती नदी : श्राद्ध हेतु प्रशस्त तीर्थों में से एक), वायु ३३.१६(मणीचक : हव्य के शाकद्वीप के स्वामी ७ पुत्रों में से एक), ३६.१८(मणिशील : अरुणोद व मन्दर के पूर्व में स्थित पर्वतों में से एक), ४३.२८(मणिवप्रा : भद्राश्व देश की मुख्य नदियों में से एक), ४३.२९(मणितटा : भद्राश्व देश की नदियों में से एक), ५०.२९(तृतीय तल में मणिमन्त नाग के पुर की स्थिति का उल्लेख), ६७.७३/२.६.७४(अर्जुन द्वारा देवों से अवध्य मणिवर्त निवासी ३ करोड दैत्यों के वध का उल्लेख), ६९.१५४/२.८.१४९(मणिदत्त : मणिभद्र व पुण्यजनी के यक्ष पुत्रों में से एक), ९९.२२२/२.३७.२१७(मणिवाहन : विद्योपरिचर वसु व गिरिका के ७ पुत्रों में से एक, अपर नाम कुश), विष्णु ४.२४.६६(मणिधान्यक वंश के भविष्य के राजाओं के जनपदों के नाम ) mani-

 

मणिकर्ण शिव ४.२२.१४(मणिकर्णिक तीर्थ का वर्णन), स्कन्द ४.१.३२.१६९ (मणिकर्णेश : शिव शरीर के वाम कर का रूप), ४.२.५७.१०८(मणिकर्ण गणपति का संक्षिप्त माहात्म्य), लक्ष्मीनारायण १.५५४.१४(मणिकर्ण तीर्थ में किराती की मोक्ष प्राप्ति ) manikarna

 

मणिकर्णिका मत्स्य १८२.२४(मणिकर्णिका में देह त्याग से इष्ट गति प्राप्त करने का उल्लेख), शिव ४.२२.१४(मणिकर्णिका की उत्पत्ति व मणिकर्णिका में ब्रह्मा की उत्पत्ति), स्कन्द ४.१.३.६(काशी में विश्वनाथ के दर्शन से पूर्व मणिकर्णिका में स्नान का विधान), ४.१.७.७९(मणिकर्णिका तीर्थ की निरुक्ति), ४.१.२६.६३ (काशी में मणिकर्णिका की उत्पत्ति का वर्णन), ४.१.३०.८४(मणिकर्णिका में सायुज्य मुक्ति प्राप्ति का उल्लेख), ४.१.३३.९(मणिकर्णिका का माहात्म्य : कलावती व माल्यकेतु राजा का वृत्तान्त), ४.१.३३.१०९(मणिकर्णिका का वर्णन), ४.१.३४.१(मणिकर्णिका का माहात्म्य, कलावती द्वारा मणिकर्णिका का स्मरण), ४.२.६१.५०(मणिकर्णिका तीर्थ का माहात्म्य), ४.२.६१.८६ (मणिकर्णिका देवी के स्वरूप का कथन), ४.२.८४.९०(मणिकर्णिका के माहात्म्य का वर्णन), ७.३.१६(मणिकर्णेश्वर का माहात्म्य, मणिकर्णिका नामक स्त्री द्वारा स्नान से सुस्वरूप प्राप्ति ) manikarnikaa

Advertisements