मकर-मङ्गल

Index of words like Makara, Makha, Magadha, Mankana, Mankanaka, Manki, Mangala.

म द्र. ओंकार

मकर अग्नि ३४१.१८(नृत्य में असंयुत कर की १३ मुद्राओं में से एक), गरुड १.५३.५(मकर निधि के स्वरूप का कथन), गर्ग ७.२९.१३(मकर गिरि पर मधु मक्षिकाओं का वास, मधु – मक्षिकाओं द्वारा प्रद्युम्न सेना पर आक्रमण व मोचन), ७.२९.१७(मकर देश में मकर मुख वाले मनुष्यों का उल्लेख), पद्म ६.२३०.११(मत्स्यावतार द्वारा मकर दैत्य का वध), ब्रह्मवैवर्त्त ४.७६.३५(उत्तरायण संक्रान्ति पर प्रयाग में स्नान का निर्देश), ब्रह्माण्ड २.३.७.४१३(मकर आदि जलचरों की ऋषा से उत्पत्ति), भविष्य १.३३.२५(मकरी : सर्प के ४ विष दन्तों की देवताओं में से एक, स्वरूप), १.१३८.३८(काम की मकर ध्वज का उल्लेख), भागवत ५.१६.२७(मेरु के उत्तर में स्थित २ पर्वतों में से एक), १२.११.१२(विष्णु के मकराकृत कुण्डलों के सांख्य और योग के प्रतीक होने का उल्लेख), मत्स्य ५८.१८(तडाग आदि निर्माण में सौवर्ण मकर दान का निर्देश), १४८.४५(तारक – सेनानी ग्रसन के ध्वज का मकर चिह्न होने का उल्लेख), मार्कण्डेय ६७.५/६५.५(पद्मिनी विद्या के अन्तर्गत ८ निधियों में से एक), ६७.१६/६५.१६ (तामसी प्रकृति वाली मकर निधि के आश्रित पुरुष के लक्षणों का कथन), वायु ४१.१०(कुबेर की ८ निधियों में से एक), १०५.४८/२.४३.४५(सूर्य व चन्द्र ग्रहण के मकर में होने पर गया में पिण्ड दान के महत्त्व का उल्लेख), विष्णु २.८.२८(उत्तरायण के आरम्भ में सूर्य के मकर राशि में आने का उल्लेख), विष्णुधर्मोत्तर ३.५२.१६(वरुण के विग्रह में मकर सौख्य का प्रतीक होने का उल्लेख), ३.१०६.३६(मकर/झष आवाहन मन्त्र), स्कन्द २.२.४२(मृग/मकर संक्रान्ति उत्सव अनुष्ठान की विधि), ६.२७१.६५(मकर संक्रान्ति को घृतकम्बल दान से बालक के  शिव गण बनने का वृत्तान्त), लक्ष्मीनारायण १.४९८.११(मकर संक्रान्ति पर विप्रों द्वारा पांच रात्रि निवास हेतु पुष्कर को जाने पर दमयन्ती द्वारा विप्र – पत्नियों को दान देने की कथा),२.१०९(जलपान देश के राजा मकरकेतु द्वारा अरुणों से युद्ध व मरण), २.१२१.१००(राशि चक्र वर्णन के  अन्तर्गत मकर राशि का उल्लेख), ३.१४.४५(इच्छानुसार रूप धारण करने वाले असंख्य माकर महादैत्यों का वर्णन), ३.१३१.९(मकरस्थ वारुणी देवी के न्यास का उल्लेख), ३.१५१.८१(दान से रहित, स्वार्थपूर्ति हेतु प्रयुक्त धन की मकर संज्ञा), ३.१७५.४(संसार सागर तरण में काम क्रोधादि रूपी मकर से विघ्न होने का उल्लेख), कथासरित् २.४.७९(मकरदंष्ट्रा कुट्टनी द्वारा निर्धन विप्र को गृह से बाहर निकलवाने का वृत्तान्त), १०.१.७९(सुन्दरी वेश्या की माता मकरकटी नामक कुट्टनी का वर्णन ) makara

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मकरध्वज ब्रह्माण्ड ३.४.११.२८(शिव द्वारा मकरध्वज के दहन का उल्लेख), ३.४.१९.६७(भण्डासुर के वधार्थी ५ कामों में से एक), ३.४.३०.५६(ललिता देवी के पुत्र रूप में उत्पन्न काम की मकरध्वज संज्ञा), ३.४.४४.७४(मकरध्वजा : वर्णों की ४८ शक्तियों में से एक), मत्स्य १५४.२४४(मकरध्वज द्वारा शिव को मोहन अस्त्र से विद्ध करने का उल्लेख), लक्ष्मीनारायण २.१४०.५७(मकरध्वज प्रकार के प्रासाद की विशेषता का कथन : १२ तिलक, ७७ अण्ड, १० तल ) makaradhwaja

 

मकरन्द भविष्य ३.३.२१.२०(अग्नि/यज्ञ से उत्पन्न मयूरध्वज – पुत्र मकरन्द द्वारा धर्म से शिलामय अश्व की प्राप्ति का प्रसंग), ३.३.२१.६३(गोवर्धन का अंश), ३.३.२१.७९(वह्नि कुण्ड से उत्पन्न व शनि – प्रदत्त भल्ल से युक्त मकरन्द द्वारा शत्रुओं को परास्त करने व जयन्त से पराजित होने का वृत्तान्त), मत्स्य १३.४३(मकरन्द पीठ में देवी की चण्डिका नाम से स्थिति का उल्लेख), कथासरित् ८.५.७९(मकरन्द के ८ वसुओं के समान विक्रम, संक्रम आदि ८ पुत्रों के नाम), १०.३.११७(विद्याधरराज – कन्या मकरन्दिका की पार्थिव राजा सोमप्रभ पर आसक्ति, माता – पिता  के शाप से निषाद – पुत्री बनना व सोमप्रभ को पति रूप में प्राप्त करना), १८.२.५(खण्डकापालिक द्वारा मकरन्द नामक उद्यान में मदनमञ्जरी यक्षी के दर्शन व उसके वशीकरण का उद्योग ) makaranda

 

मकराक्ष वामन ५७.८९(गयाशिर द्वारा कार्तिकेय को प्रदत्त गण), ५८.७८(मकराक्ष द्वारा बाण से युद्ध का कथन), स्कन्द ३.१.४४.३७(खर – पुत्र, विभीषण द्वारा वध का उल्लेख), वा.रामायण ६.७८+ (खर – पुत्र, राम द्वारा वध ) makaraaksha

 

मक्षिका गरुड १.२१७.२४(भोजन चोरी करने से मक्षिका योनि प्राप्ति का उल्लेख), गर्ग ७.२९.१२(मकर गिरि पर मधुमक्षिकाओं द्वारा प्रद्युम्न सेना पर आक्रमण, वायव्य अस्त्र से शान्ति), पद्म ५.१०५.१५९(द्विज – पुत्र करुण का द्विजों के शाप से मक्षिका बनने तथा दधीचि द्वारा भस्म प्रभाव से शाप का अन्त करने की कथा), मार्कण्डेय १५.१९(भोजन चोरी के दुष्कृत्य के फलस्वरूप मक्षिका योनि प्राप्ति का उल्लेख), लक्ष्मीनारायण २.२१४.३३(माक्षिका नगरी का उल्लेख), ३.१७.८६ (मधुविद्य विप्र की भार्या माक्षिकीसत्य से रमा का प्रमाक्षिकीरमा रूप में अवतार ) makshikaa

 

मख पद्म १.५०.७(पिता, पति अर्चना, मित्र – अद्रोह आदि ५ मखों के महत्त्व का वर्णन : नरोत्तम विप्र का मूक पतिव्रता, तुलाधार आदि के पास जाकर शिक्षा ग्रहण करना), ब्रह्माण्ड ३.४.२१.८१(मखशत्रु व मखास्कन्दी : भण्डासुर के सेनापति पुत्रों में से २), ३.४.२६.४८(वही), भविष्य ३.२.२९.४(मख की परिभाषा : माताओं व देवताओं के लिए स्वधा, स्वाहा), भागवत ६.१८.१(महामख : सविता व पृश्नि की सन्तानों में से एक), ११.१७.१२(मख/यज्ञ से विराट् पुरुष के प्राकट्य का उल्लेख), १२.११.४४(मखापेत : ऊर्ज/कार्तिक मास में सूर्य रथ पर स्थित राक्षस), वायु ११२.५१/२.५०.६३(मख तीर्थ की उत्पत्ति व मख तीर्थ में पिण्ड दान का महत्त्व), स्कन्द ४.२.८४.६२(मख तीर्थ में स्नान से यज्ञ से प्राप्त पुण्य के समान पुण्य की प्राप्ति का उल्लेख), लक्ष्मीनारायण १.३१६.३(शतमख : द्युवर्णा – पति, अधिमास नवमी व्रत से नर – नारायण की पुत्र द्वय रूप में प्राप्ति का वृत्तान्त ), द्र. शतमख makha

 

मग अग्नि ११९.२१(, भविष्य १.११७.५३(देवपूजा हेतु सूर्य के तेज से आठ मग/भोजक उत्पन्न होने का वर्णन), १.१३९+ (सूर्य व निक्षुभा – पुत्र मग की साम्ब द्वारा सूर्य अर्चना हेतु नियुक्ति), १.१४४.२५(मग की निरुक्ति : ओंकार में म का ध्यान योग करने वाले), १.१७१( मग द्वारा आचरणीय धर्म ) maga

 

मगध गणेश १.३६.२२(मगध राजा के पिता के श्राद्ध में गृत्समद ऋषि के जन्म का भेद खुलना), गर्ग ७.१७(प्रद्युम्न द्वारा मगध विजय हेतु प्रस्थान), पद्म ६.२१६.३(मगधदेशीय द्विज देवदास की इन्द्रप्रस्थ तीर्थ यात्रा का वर्णन), ब्रह्माण्ड १.२.३६.१७२(पृथु के यज्ञ में सूत व मागध की उत्पत्ति, पृथु द्वारा दोनों की वृत्तियों तथा राज्य के निर्धारण का कथन), २.३.३९.८(परशुराम द्वारा मागध राजा को चरणाघात से मारने का उल्लेख), भागवत ९.२२.४५(मगध देशीय राजाओं का वर्णन), वामन ११.७(मगधारण्य के ऋषियों द्वारा धर्मोपदेश), ९०.२५(मगध में विष्णु का सुधापति नाम), वायु ४५.१११(मध्य देश के जनपदों में से एक), ४५.१२३(मगधगोविन्द : पूर्व के जनपदों में से ), ४७.४८(गङ्गा द्वारा प्लावित आर्य जनपदों में से एक), ६२.१३५/२.१.१३५(पितामह के यज्ञ में सूत व मागध की उत्पत्ति, मागध के कर्म का नियतन, पृथु द्वारा मागध को मगध देश देने का कथन), ९९.२९४/२.३७.२८९(मागध बृहद्रथ वंश का वर्णन), विष्णु ४.२३(मगध देशीय बृहद्रथ वंश का वर्णन), ४.२४.६१(मगध में विश्वस्फटिक द्वारा अन्य वर्णों को स्थापित करने का उल्लेख), स्कन्द ३.३.१३(मगधराज हेमरथ द्वारा दशार्ण देश पर विजय, पश्चात् दशार्ण के राजपुत्र  भद्रायु द्वारा युद्ध व विजय प्राप्ति), महाभारत कर्ण ४५.३४(मागधों के इंगितज्ञ होने का उल्लेख), वा.रामायण १.१३.२६(मगधाधिपति प्राप्तिज्ञ के दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ में आने का उल्लेख), कथासरित् ३.१.९(राज्य रक्षा हेतु मगधराज प्रद्योत की पुत्री पद्मावती से उदयन के विवाह की योजना), १२.२.४७(मगध के राजा भद्रबाहु द्वारा वाराणसी के राजा की कन्या अनङ्गलीला को प्राप्त करने का वृत्तान्त ) magadha

 

मघ लक्ष्मीनारायण २.७२.२६(ज्यामघ द्वारा स्वभ्राता श्रीमघ को राज्य सौंपकर वन में गमन, भ्राता – द्वय द्वारा यज्ञ का अनुष्ठान, श्री व नारायण के नगर में निवास हेतु देवालय का निर्माण ), द्र. जाड्यमघ, ज्यामघ, श्रीमघ magha

 

मघवा देवीभागवत १.३.२८(सप्तम द्वापर में मघवा व्यास का उल्लेख ) maghavaa

 

मघा ब्रह्माण्ड २.३.१७.२१(मघा नक्षत्रों में श्राद्ध की प्रशंसा), भागवत १२.२.२८(परीक्षित् के काल में सप्तर्षियों की मघा नक्षत्र पर स्थिति का उल्लेख), मत्स्य १७.३(मघा नक्षत्र में श्राद्ध का निर्देश), वायु ६६.४९/२.५.४९(मघा के अर्यमी वीथि में स्थित होने का उल्लेख), ८१.२५/२.१९.२५(पितरों को मघा नक्षत्र प्रिय होने का कथन), ८२.६/२.२०.६(नक्षत्रों में मघा में श्राद्ध से ज्ञातियों में श्रेष्ठ होने का उल्लेख), ९९.४२३/२.३७.४१७(परीक्षित् के काल में सप्तर्षियों के मघा नक्षत्र पर होने का उल्लेख ), द्र. नक्षत्र maghaa

 

मङ्कुती ब्रह्माण्ड १.२.१६.३१(ऋक्षवान् पर्वत से नि:सृत नदियों में से एक ) mankatee/ mankati

 

मङ्कण भविष्य ३.३.३१.१५७(मङ्कण – कन्या किन्नरी का उल्लेख), ३.३.३२.४७(रूप/रूम देश – अधिपति व विरज के अंश किन्नर का उल्लेख), ३.३.३२.१३०(किन्नर भूपति व पृथ्वीराज – सेनानी  मङ्कण द्वारा युद्ध में अदृश्य रूप धारण करने पर इन्दुल द्वारा बन्धन, मुक्ति होने पर इन्दुल से युद्ध, दोनों की मृत्यु), लक्ष्मीनारायण १.५५३.४०(सिद्धि प्राप्ति के गर्व से मङ्कण ऋषि का नर्तन, शिव द्वारा अवरोध ) mankana

 

मङ्कणक कूर्म २.३५.४४(मङ्कणक ऋषि के हाथ से भस्म निर्गम की कथा, शङ्कर द्वारा गर्व भङ्ग), पद्म  १.१८.१३२(प्राची सरस्वती के माहात्म्य के संदर्भ में मङ्कणक ऋषि के कर से शाकरस स्रवण की कथा), ३.२७.५(सप्त सारस्वत तीर्थ के माहात्म्य के संदर्भ में मङ्कण के कर से शाक रस स्रवण की कथा), ५.११७.२५(मङ्कणक – पुत्र आकथ का वृत्तान्त), वामन ३७.३१(मङ्कणक ऋषि द्वारा कुरुक्षेत्र में सरस्वती नदी का आह्वान), ३८(कश्यप के मानस पुत्र मङ्कणक मुनि की कथा), ६२(मङ्कणक के कर से शाकरस स्रवण का प्रसंग), ६२.४५(सप्तसारस्वत में नृत्य करते हुए मङ्कणक को शिव द्वारा रोकना), ७२.७३(मङ्कणक के शुक्र से सात मरुतों का जन्म), स्कन्द ५.२.२(हाथ से शाकरस स्रवण करने वाले ऋषि मङ्कणक का शिव द्वारा दर्प भङ्ग), ६.४०.२७(विष विद्या विचक्षण मङ्कणक ऋषि के हाथ से शाकरस स्रवण व दर्प भङ्ग की कथा), ७.१.२७०(ऋषि मङ्कणक के गर्व भङ्ग का प्रसंग), ७.३.१०.४०(हाथ से रस स्रवण करने वाले मङ्कणक का शिव द्वारा दर्प भङ्ग), कथासरित् ६.६.९९(मङ्कणक ऋषि की पुत्री कदलीगर्भा के जन्म, विवाह आदि की कथा ) mankanaka

 

मङ्कन ब्रह्माण्ड २.३.६७.४२(निकुम्भ नामक गणेश द्वारा स्वप्न में वाराणसी के मङ्कन नामक द्विज को नगर सीमा पर प्रतिमा निर्माण का निर्देश), वायु ९२.३८/२.३०.३८(वही) mankana

 

 

मङ्कि पद्म ६.१४३(कौषीतक – पुत्र, पुत्र प्राप्ति हेतु साभ्रमती तट पर तप), मत्स्य १९५.२२(माङ्कायन : भार्गव गोत्रकार ऋषियों में से एक), वामन ७२.७१(वपु अप्सरा द्वारा मङ्कि ऋषि के तप में विघ्न, मङ्कि द्वारा शाप), स्कन्द ७.१.१८४(मङ्की ऋषि के नाम पर मङ्कीश्वर लिङ्ग की स्थापना), ७.१.२०३(कुब्जकाय मङ्कि द्विज द्वारा शिवाराधना), ७.१.२७०(ऋषि मङ्कणक द्वारा तप करने से मङ्कीश्वर लिङ्ग की उत्पत्ति व माहात्म्य), ७.३.२५(मूर्ख विप्र मङ्कि का पिण्डारक गण बनना), योगवासिष्ठ ६.२.२३+ (मङ्कि विप्र का वसिष्ठ से वासना से मुक्ति विषयक प्रश्न), लक्ष्मीनारायण २.११०.८६(मञ्चूरों के राजा प्रभाकिरीट व गुरु मङ्किरथ का उल्लेख ) manki

 

मङ्गल गणेश २.७६.१४(विष्णु व सिन्धु के युद्ध में भौम का कदम्ब से युद्ध), २.८५.२५(मङ्गलमूर्ति  गणेश से ऊरु की रक्षा की प्रार्थना), २.१०६.४(गणेश द्वारा क्रोड रूप धारी मङ्गल दैत्य का वध), गर्ग ४.२(वङ्ग देश में मङ्गल गोप द्वारा स्व कन्याओं को कृष्ण हेतु नन्दराज को देना), ७.२९.२०(मङ्गल की निवास भूमि चर्चिका नगरी का वर्णन), देवीभागवत ९.९.४३(पृथ्वी से मङ्गल ग्रह की उत्पत्ति की कथा), ९.२२.८(देवासुर सङ्ग्राम में मङ्गल का शङ्खचूड – सेनानी उषाक्ष से युद्ध), पद्म १.२४(अङ्गारक चतुर्थी व्रत विधि के संदर्भ में रुद्र के स्वेदबिन्दु से वीरभद्र की उत्पत्ति, वीरभद्र का मङ्गल ग्रह बनना), १.८१.४०(शिव द्वारा शुक्राचार्य को मुख मार्ग से निकाल कर भूमि पर गिराने से मङ्गल/भौम की उत्पत्ति), ब्रह्मवैवर्त्त १.९.२१(उपेन्द्र व वसुन्धरा से मङ्गल के जन्म का प्रसंग), ब्रह्माण्ड २.३.३८.४९(परशुराम द्वारा कार्त्तवीर्य के सहायक मङ्गल/मत्स्यराज संज्ञक नृप के वध का कथन), ३.४.२८.४५(भण्डासुर – सेनानी, स्वप्नेशी देवी से युद्ध), भविष्य १.३४.२२(भूमि-पुत्र का तक्षक नाग से साम्य), ३.४.१७.४८(मङ्गल ग्रह : ध्रुव व धरादेवी – पुत्र), ३.४.२५.३६(मङ्गल ग्रह का मोह नाम से उल्लेख?, ब्रह्माण्ड रसना से मोह की तथा मोह द्वारा सावर्णि मन्वन्तर की रचना का उल्लेख), भागवत ५.१९.१६(मङ्गलप्रस्थ : भारत के अनेक पर्वतों में से एक), १२.६.७९(माङ्गलि : पौष्यञ्जि के सामग शिष्यों में से एक, गुरु से १०० संहिताओं की प्राप्ति का उल्लेख), वायु ३१.७(देवों के याम नामक गण के १२ देवों में से एक), शिव २.३.१०(रुद्र भाल से मङ्गल की उत्पत्ति का वर्णन), २.५.३६.१२(मङ्गल द्वारा शङ्खचूड – सेनानी गणकाक्ष से युद्ध का उल्लेख), स्कन्द ३.१.१२(मङ्गल तीर्थ के प्रभाव से राजा मनोजव की विजय व शिव लोक प्राप्ति की कथा), ४.२.५७.१११(मङ्गल विनायक का संक्षिप्त माहात्म्य), ४.२.८४.५९(मङ्गल तीर्थ का संक्षिप्त माहात्म्य : स्नान से अमङ्गल नाश व मङ्गल प्राप्ति), ५.२.४४.३३(मङ्गल ग्रह द्वारा वरुण देव को पीडित करने का उल्लेख), ५.३.६९(मङ्गल तीर्थ का माहात्म्य, मङ्गल द्वारा शिव आराधना), ५.३.१४८(मङ्गलेश्वर तीर्थ का माहात्म्य, मङ्गल ग्रह की अर्चना), ६.२५२.३६(चातुर्मास में भूमिपुत्र की खदिर में स्थिति का उल्लेख), लक्ष्मीनारायण १.१८३.१६(मङ्गल ग्रह की उत्पत्ति का वर्णन), १.३३७.४४ (मङ्गल का शङ्खचूड – सेनानी मण्डूकाक्ष से युद्ध), १.४४१.९०(नारायण ह्रद में वृक्ष स्वरूप कृष्ण से मिलने हेतु मङ्गल द्वारा खदिर वृक्ष होने का उल्लेख), १.५३८.२३(त्रिपुर विनाशार्थ शिव के नेत्र अश्रु से भौम/मङ्गल की उत्पत्ति), २.१४०.५८(मङ्गल प्रासाद के लक्षण), ३.२१३(मङ्गलदेव चर्मकार की भक्ति से प्रसन्न भगवान् द्वारा स्वयं आकर विष नाश करने की कथा), कथासरित् ९.१.१६०(राजा पृथ्वीरूप द्वारा मङ्गलघट हाथी पर चढकर बारात ले जाना ) mangala